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Sunday, February 6, 2011

एक दिन

 Here is something I wrote long back... I found it hilarious at that time... Now, not sure.. let me know if you like it :)
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एक दिन


एक दिन हमनें सोचा, चलो कुछ अलग किया जाए,

जब सुने सबके विचार, तो सर चकराए,

एक दिन की बात हम क्यों तुम्हे बताएँ?

न न, कुछ नहीं है इसमें शरारत, आप न घबरायें.

खैर, छोड़िये इन बातों को, आइये किस्सा आगे बढाएँ

तो उस एक दिन हमने क्या किया?

कुछ नहीं जनाब, जैसे ही हमने कुछ सोचने की हिमाकत की,

कुछ मच्छरों ने हमारा खून पिया,

हमने गलती से, एक को छेड़ दिया

उसके बाद तो उन्होंने blood donation कैंप शुरू किया

जैसे तैसे जान बचाकर,

कुछ एक बूंदे लहू की बहाकर,

जब हम रण से भाग चले,

अभी तक तो मच्छर थे,

अब कुछ अति विचित्र पशु हमारे पीछे पड़े

हमने जैसे ही सर घुमाया

और उन विचित्र जानवरों को पाया,

उनके पीछे आने का कारण जानकार,

अति शीघ्र अपना लाल झोला उठाया,

उठाया और भाग चले ऐसे,

olympic जीतने का विचार हो जैसे

सड़क को खतरनाक जानकर

मित्रों का कहा मानकर

हमने एक कमरे में सभा जमाई

घर हमारा था, कमरा हमारा

मित्रों ने अपना ही जानकर, बाहर की दुकान से soft drink मँगवाई

हमने बिना ये जाने, के जेबें साफ़ किसकी होंगी,

जैसे ही पेय की और हाथ बढ़ाये,

दुकानदार का लड़का आकर बोला,

बिल कौन देगा भैया, पहले ये बतलाएं

मित्रगणों की ऊँगली अपनी और उठी देखकर,

हमने जेब पर हाथ फिराए

और हर बार की तरह निराश होने के बाद, कुछ बहाने बनाये

हमने कहा - Pepsi , cola या हो thumbs up , सबमे है pesticide ,

हमे अभी बिताना है एक दिन, नहीं करनी suicide .

मित्रों ने तर्क वितर्क किया,

जाने कौन प्रस्ताव पास, कौन सा फेल किया,

अंत में सुनाया अपना decision,

अगर result में आ गयी III division,

तो गोलियों का खर्चा बचेगा,

इसलिए अब soft drink पीने का अभियान चलेगा

हमने जाने किस किस कोने को कमरे में टटोला,

bychance हाथ में आ गया एक बड़ा सा झोला

जाने कब से पड़े उसमे कुछ सिक्के थे

हाँ थे सभी सिक्के, नोट इक्के दुक्के थे

हमने बिल तपो चुकाया, पर गला soft drink निगल न पाया

फिर से चर्चा शुरू हुई - एक दिन कैसे बिताया जाए?

सभी ने एक दुसरे के प्रस्ताव, सुने और सुनाये

अंत में तय हुआ की चलो reporters का वेश धरे, और parliament चले.

फ्री का entertainment होगा, जब वहां सब फाड़ेंगे गले.

और हम सभी तैयार हुए, एक बस में सवार हुए

जैसे ही gate पर पहुंचे, दरबान से दो चार हुए

अंत में थकहार कर

दरबान की मनुहार कर,

फिर भी अन्दर न जाने पाए

वापस आये मुँह लटकाए

सब एक साथ बोले - लौट के बुद्धू घर को आये

हमे रोना आया, हमने जोर से चिल्लाया

माँ ने जगाया, मन ने सुकून पाया

मैं केवल इतना ही कहने पाया - कभी न आये ये एक दिन...

रचना

६-९-२००३

4 comments:

  1. Super like!!! It's hilarious.

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  2. hanks dude! glad you liked it :)

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  3. amazing pace...the soft drink abhiyan, excuse and IIIrd division tark-vitark was the best part, and yeah, the blood donation camp part :)truly hilarious...

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